शनिवार, 25 जुलाई 2020

नारी तू केवल नारी है.........

नारी तू केवल नारी है, 
इस शब्द जाल से बाहर निकल।
तेरे सपनों को कुचल रहा जो
उस भ्रमजाल से बाहर निकल।

तू दुर्गा है, तू सरस्वती, 
तू ईश्वर का है अद्भुत रूप।
तू कवि की मधुर कल्पना है,
तू स्वप्न का है विशुद्ध रूप।

तू शक्ति है, तू है दुर्गा 
तू कामदेव की चंचलता।
क्यूँ भूल रही अपना परिचय,
तू धरा की है अद्भुत रचना।

तेरे आँचल में ही बैठकर
मानव ने चलना सीखा।
चलना गिरना, गिर कर उठना
फिर तेरा ही सिर कुचलना सीखा।

अब जाग ज़रा और चेतन हो जा 
अपनी अलग पहचान बना।
जो बीत गया, उसे भूल जा
एक नए युग का शंख बजा।

अब बन जा तू पर्वत अटल,
कर ख़ुद को इतना सक्षम सबल
कि तेरी एक हुंकार से ही
हिल जाए नभ, जल और ये थल।

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